विदेशी दुल्हन को मिल जाती है नागरिकता, दूल्हे को क्यों नहीं?
"मैं अपने परिवार के साथ 2001 में यह सोचकर पाकिस्तान आई थी कि पाकिस्तान मेरा जन्मस्थान है. इस आधार पर मेरे पति सैयद आमिर अली को आसानी से पाकिस्तानी नागरिकता मिल जाएगी. जब हम लाहौर पहुंचे और आवेदन जमा किया तो हमारे पैरों तले से ज़मीन खिसक गई. हमें पता चला कि विदेशियों से शादी करने वाली पाकिस्तानी महिलाओं के पतियों को शादी के आधार पर पाकिस्तान की नागरिकता नहीं मिल सकती."
ये कहना है आमिर आमिर का जो पंजाब के लाहौर शहर में रहती हैं. चार बच्चों की मां आलिमा आमिर के पति एक भारतीय नागरिक हैं और इस समय वो अदालत के आदेश पर पाकिस्तान में रह रहे हैं.
आलिमा आमिर 1996 में शादी कर भारत आ गई थीं. फिर 2001 में, पाँच साल बाद पति और पत्नी ने अपने परिवार के साथ पाकिस्तान में बसने का फ़ैसला किया.
आलिमा को अच्छी तरह याद है, जब वो अपने परिवार के साथ भारत से पाकिस्तान जा रही थीं.
वो कहती हैं, ''हमें नहीं पता था कि पाकिस्तान में कोई ऐसा क़ानून है. हमने सोचा था कि दोनों पति-पत्नी को ये अधिकार है कि वो अपने साथी के लिए नागरिकता हासिल कर सकते हैं.
''लेकिन जब हम पाकिस्तान गए तो हमें पता चला कि ये मुमकि नहीं है. और तब से हमारे और हमारे बच्चों के लिए बेइंतहां मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. शुक्र है कि अदालतें और पाकिस्तानी अधिकारी हमारे मामले को मानवीय आधार पर देखते रहे. नहीं तो पता नहीं हमारा क्या होता.''
पाकिस्तान में ऐसी कई आलिमा आमिर हैं
ये सिर्फ़ एक आलिमा आमिर की कहानी नहीं है. पाकिस्तान में ऐसी कई महिलाएं हैं, जिन्हें विदेशी लोगों से शादी करने के बाद दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
हाल में, पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह ज़िले में पेशावर की रहने वाली समिया रूही ने पेशावर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है. उन्होंने अपने अफ़ग़ान पति को पाकिस्तानी नागरिकता देने की मांग की है.
याचिका में समिया रूही का कहना है कि उनके पांच बच्चे हैं. उनके पति कुवैत में काम करते हैं, जिन्हें कोरोना के पहले बच्चों से मिलने के लिए एक महीने का वीज़ा दिया जाता था, लेकिन अब उन्हें वो भी नहीं मिल रहा है. वो कहती है कि उन्हें अपने पति के बिना बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
समिया का कहना है कि उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि बच्चों की क़ानूनी ज़रूरतें बढ़ रही हैं, ऐसे में उनके पिता की ग़ैर मौजूदगी और उनके पास पाकिस्तान की नागरिकता के न होने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो सकता है.
इस तरह की समस्याओं का सामना कितनी पाकिस्तानी महिलाएं कर रही हैं, इसका पूरा डेटा तो किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी संगठन के पास नहीं है. हालांकि आसमा जहांगीर फ़ाउंडेशन की कार्यकारी अधिकारी निदा अली एडवोकेट के मुताबिक़ ऐसे कई मामले हैं.
वो कहती हैं, ''हमारी जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लंबित है. देश के अलग-अलग हाईकोर्टों में भी ऐसी याचिकाएं दायर की गई हैं. ऐसे मामलों की संख्या अधिक हो सकती है.
पाकिस्तानी नागरिकता का क़ानून क्या है?
पाकिस्तान की नागरिकता के लिए नागरिकता अधिनियम 1951 मौजूद है. इसमें ये बताया गया है कि किसे पाकिस्तानी नागरिकता मिल सकती है और किसे नहीं.
इस अधिनियम की धारा 10 स्पष्ट करती है कि शादी के मामले में कौन पाकिस्तानी नागरिकता का हक़दार होगा और कौन नहीं.
इस धारा के तहत, यदि कोई पाकिस्तानी पुरुष किसी विदेशी महिला से शादी करता है, तो वो पाकिस्तानी नागरिकता हासिल करने की हक़दार है. लेकिन ये अधिकार महिलाओं को नहीं दिया गया.
https://pharmatalk.org/read-
https://takarat.com/ad-view/
https://gab.com/pharmay550/
https://www.face-world.net/
https://www.petslambook.com/
https://www.emazoo.com/blogs/
https://bumppy.com/tm/post/
https://www.beqbe.com/
https://www.vingle.net/posts/
https://butterflycoins.org/
https://browsemycity.com/
https://www.twarak.com/ad/
https://showmyads.in/osclass/
https://classifiedz.in/
https://hahasale.com/jobs/
https://www.expatriates.com/
https://issuu.com/
https://www.behance.net/
https://ello.co/pharmacy550/
https://medium.com/@
https://postila.ru/post/
https://www.slideshare.net/
https://www.slideserve.com/
https://www.scribd.com/
http://photozou.jp/community/
https://www.jigwe.in/
https://vialisted.com/
https://delhi.doplim.in/buy-
https://www.
Comments
Post a Comment