इसराइल में फ़ेसबुक के नए नाम 'मेटा' का क्यों उड़ाया जा रहा है मज़ाक
इसराइल में फ़ेसबुक के नए नाम मेटा का मज़ाक उड़ाया जा रहा है. फ़ेसबुक ने इसी हफ़्ते अपना नाम बदल कर मेटा किया है.
इसराइल में मेटा का उच्चारण हिब्रू में 'मृत' के जैसा होता है. मेटा को हिब्रू में स्त्रीलिंग शब्द की तरह उच्चारित किया जाता है.
कई लोगों ने इसे लेकर ट्विटर पर हैशटैग #FacebookDead के साथ अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.
एक टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट निरित वेइस ब्लैट ने ट्वीट किया, "हिब्रू में 'मेटा' मतलब 'मृत' होता है. यहूदी आने वाले सालों में इसका मज़ाक उड़ाएंगे."
ज़करबर्ग ने क्या बताया था?
फ़ेसबुक के मुताबिक नाम में बदलाव अलग-अलग प्लेफॉर्म्स, जैसे- फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप्प में नहीं होगा बल्कि ये इन सबके स्वामित्व वाली पेरेंट कंपनी के लिए है.
यानी मेटा पेरेंट कंपनी है और फ़ेसबुक, व्हाट्सएप्प और इंस्टाग्राम इनके हिस्सा हैं. साथ ही कंपनी का ये भी कहना है कि वो सोशल मीडिया से आगे वर्चुअल रियलिटी में अपनी पहुंच बढ़ाएगी.
फ़ेसबुक ने यह क़दम तब उठाया है, जब उसकी एक पूर्व कर्मी की ओर से दस्वावेज़ लीक करने के बाद नकारात्मक रिपोर्ट्स सिलसिलेवार ढंग से सामने आईं. फ़ेसबुक की पूर्व कर्मी फ़्रांसेस हॉगन ने आरोप लगाया था कि यह सोशल मीडिया कंपनी सुरक्षा को दांव पर लगाकर मुनाफ़े के लिए काम कर रही है.
फ़ेसबुक के मालिक मार्क ज़करबर्ग ने घोषणा की है कि नया नाम मेटावर्स प्लान का हिस्सा है. मेटावर्स का मतलब एक ऑनलाइन दुनिया से है, जहाँ लोग वर्चुअली गेम खेल सकते हैं, काम कर सकते हैं और संपर्क स्थापित कर सकते हैं. इसे वीआर (वर्चुअल रियलिटी) हेडसेट्स भी कहा जा रहा है.
ज़करबर्ग ने कहा कि अभी हम जो कर रहे हैं, उस लिहाज से मौजूदा ब्रैंड नाकाफ़ी है. उन्होंने कहा कि एक ऐसी ब्रैंडिंग की ज़रूरत थी, जो हमारे सभी कामों का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हो. हमारी नज़र भविष्य पर है.
ज़करबर्ग ने एक वर्चुअल कॉन्फ़्रेंस में कहा, "मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में हम एक मेटावर्स कंपनी के रूप में देखे जाएंगे. हम चाहते हैं कि हमारा काम और हमारी पहचान, जो हम करना चाह रहे हैं, वैसा ही हो. हम अपने कारोबार को दो हिस्सों में देखना चाहते हैं. एक फैमिली ऐप्स और दूसरा भविष्य के प्लेटफॉर्म्स के लिए हमारा काम."
ज़करबर्ग ने कहा, "अब समय आ गया है कि जो भी हम कर रहे हैं, वो नए ब्रैंड के तहत हो ताकि पता चले कि हम कौन हैं और क्या करने जा रहे हैं."
इसके बावजूद इसराइल में एक यूज़र ने कहा, "शायद फ़ेसबुक (अब मेटा) को रीब्रांडिंग को लेकर कुछ शोध करना चाहिए था."
साल 2015 में गूगल ने भी इसी तरह का क़दम उठाया था.
उसने भी पेरेंट कंपनी का नाम बदलकर अल्फ़ाबेट कर दिया था. हालाँकि यह नाम प्रचलन में नहीं आया.
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